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भव्य जग जननी दरबार

भव्य जग जननी दरबार

Bhavya Jag Janani Darbar | जल वाला मंदिर

गुरु जी से मिलने का समय: प्रातः 6 बजे - 11 बजे

+91 9810074170, 9313284241, 9818705859

दर्शन एवं गुरु जी से मिलने का समय

Darshan & Meeting Timings

दिनसमय
मंगलवारप्रातः 6 बजे से 11 बजे तक
बुद्धवारप्रातः 6 बजे से 11 बजे तक
बृहस्पतिवारप्रातः 6 बजे से 11 बजे तक
शुक्रवारप्रातः 6 बजे से 11 बजे तक
शनिवारप्रातः 7 बजे से दोपहर 3:30 बजे तक (केवल दूर वालों के लिए)
रविवारप्रातः 7 बजे से दोपहर 12 बजे तक (महीने के दूसरे रविवार को छोड़कर)
शुक्ल पक्ष की अष्टमीप्रातः 8 बजे से शाम 4 बजे तक
🌅

मंगला आरती

5:00 AM - 5:30 AM
प्रातःकालीन मंगला आरती
🌞

प्रातः श्रृंगार

6:00 AM - 12:00 PM
प्रातः दर्शन एवं पूजा
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सायं आरती

7:00 PM - 7:30 PM
संध्या आरती एवं भजन
🌙

शयन आरती

9:00 PM - 9:15 PM
रात्रि शयन आरती

📝 श्रद्धालु भक्तजनों के दर्शन हेतु निर्धारित समय: प्रातः 7 बजे से रात 8 बजे तक

1. दरबार में हर प्रकार की बीमारी व समस्या के लिए श्रद्धालुओं की निशुल्क सेवा की जाती है।

2. बच्चों के साथ माता-पिता का आना अनिवार्य है।

3. दरबार में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए मादकपान, धूम्रपान, लहसुन, प्याज आदि को त्यागना आवश्यक है।

4. लाइलाज रोगी को कभी रात में न लायें, केवल गुरुजी के गद्दी पर बैठने के समय पर ही लायें।

5. दरबार में जूते, चप्पल, घड़ी, चश्मा, मोबाइल फोन आदि बाहर ही रखे जाएं।

6. श्रद्धालु अपने सामान की सुरक्षा स्वयं सुनिश्चित करें।

7. जल ले जाने के लिए श्रद्धालु खाली शीशी साथ लाएं।

8. हवन सत्संग में भाग लेने वाले गर्भवती महिला प्रेग्नेंट ध्यान दें प्रसवणी गर्भवती को सत्संग में नहीं बैठना चाहिए।

9. दरबार में आने वाले श्रद्धालु अपना सामान आना तक शांति से बैठकर भजन गा सकते हैं।

10. किसी पूजा फल, रोली, चंदन, गुलाल, सिंदूर, चावल, फूल आदि सामान दरबार के अंदर न लाएं।

11. प्रत्येक सोमवार एवं महीने के दूसरे रविवार को गुरु जी श्रद्धालु भक्तजनो से नहीं मिलते।

12. शुक्ल पक्ष की सप्तमी में शाम 4 बजे से महामाई की विशेष पूजा अर्चना, हवन यज्ञ तत्पश्चात रात्रि में जागरण होता है जिसकी ज्योति प्रज्वलित गुरु महाराज के द्वारा की जाती है एवं अष्टमी में भंडारा होता है।

13. कृष्ण पक्ष की अष्टमी में दोपहर 2 बजे से महामाई की पूजा अर्चना, हवन यज्ञ एवं शाम को सत्संग होता है।