🙏 जय माता दी! | भव्य जग जननी दरबार - जल वाला मंदिर | संपर्क: 9810074170, 9313284241, 9818705859 🙏
भव्य जग जननी दरबार

भव्य जग जननी दरबार

Bhavya Jag Janani Darbar | जल वाला मंदिर

बृजघाट पीठाधीश्वर - महामण्डलेश्वर गुरु जी से मिलने का समय: प्रातः 6 बजे - 11 बजे

+91 9810074170, 9313284241, 9818705859

भव्य जग जननी दरबार

About Bhavya Jag Janani Darbar

भव्य जग जननी दरबार
27+
वर्षों से
सेवा में

🙏 जय माता की 🙏

भव्य जग जननी दरबार (जल मन्दिर के नाम से भी जाना जाता है) में बृजघाट पीठाधीश्वर श्री श्री 1008 महामण्डलेश्वर स्वामी श्री जलेश्वरानन्द गिरी जी महाराज द्वारा भक्तों की निशुल्क सेवा की जाती है। जहाँ माँ की कृपा व् गुरु जी के आशीर्वाद से अंधों की आँखों में रोशनी, गूंगों को वाणी, असाध्य से असाध्य बीमारी ठीक और बहनों को संतान प्राप्त हो रहीं हैं।

दिल्ली बस अड्डा से 10 किमी दूर दिल्ली उ0 प्र0 के लोनी बार्डर के पास पाइप लाइन के साथ संगम सिनेमा रोड से आगे पूर्व की ओर चलकर रेलवे लाइन के पास बी-45, न्यू रामप्रस्थ विहार, बेहटा हाजीपुर जिला गाज़ियाबाद उ0 प्र0 में स्थित है।

शाहदरा से शामली वाली रेलवे लाइन पर शहदरा से बेहटा हाजीपुर स्टेशन पर उतरकर भी दरबार पहुंचा जा सकता है। माँ के इस दरबार में माता की इतनी असीम कृपा है के यहा आने वाले भक्तों को इस कलयुग मे माँ भगवती के शुभ आशीर्वाद से वह सब प्राप्त हो रहा है जिसकी कल्पना तक नहीं की जा सकती।

निशुल्क सेवा
असाध्य रोगों का उपचार
संतान प्राप्ति
नेत्र ज्योति प्रदान

बृजघाट पीठाधीश्वर

परम पूज्य जल वाले गुरु जी

श्री श्री 1008 महामण्डलेश्वर स्वामी श्री जलेश्वरानन्द गिरी जी महाराज

श्री श्री 1008 महामण्डलेश्वर स्वामी श्री जलेश्वरानन्द गिरी जी महाराज

बृजघाट पीठाधीश्वर श्री श्री 1008 महामण्डलेश्वर स्वामी श्री जलेश्वरानन्द गिरी जी महाराज (जल वाले गुरु जी) का जन्म बागपत जिले के खट्टा प्रह्लादपुर गाँव में एक प्रतिष्ठित ब्राह्मण परिवार में माघ शुक्ल पंचमी (बसंत पंचमी) संवत 2007 तदनुसार 11 फरवरी सन् 1951 में हुआ था।

इनके पिता का नाम श्री खचेडू शर्मा और माता का नाम श्रीमती जिहानी देवी था। वे धार्मिक प्रवृति के परोपकारी व्यक्ति थे। आपकी प्रारम्भिक शिक्षा घर पर ही सम्पन्न हुई।

दिनांक 10 फरवरी 2025 को महाकुम्भ प्रयागराज में श्री पंच दशनाम जूना अखाड़ा द्वारा पूज्य गुरु देव को महामण्डलेश्वर की उपाधि से विभूषित किया गया।

सन् 1990 में वैष्णो देवी की यात्रा में कटरे से भवन की चढ़ाई चढ़ते समय आपको माँ भगवती का साक्षात्कार हुआ। तभी से माँ भगवती की कृपा से भक्तों की निशुल्क सेवा कर रहे हैं।

माँ भगवती की असीम अनुकम्पा एवं परम श्रद्धेय गुरु जी के शुभाशीर्वाद से अंधों की आँखों में रोशनी, गूंगों को वाणी, असाध्य से असाध्य बीमारी ठीक और बहनों को संतान प्राप्त हो रहीं हैं।